पाकिस्तान

कभी -कभी मुझमें पाकिस्तान पर दया और सहानुभूति का भाव उदित होता है। भारत पाकिस्तान की माँ है। अपनी माँ को छोड़कर उसने दूसरे के पिता को अपना पिता समझा। भारत माँ को त्याग कर , पाकिस्तान ने अरब को अपना पिता बनाना चाहा। अरब ने उसे स्वीकार किया , परंतु पुत्र की तरह नहीं। पाकिस्तान को अरब ने एक गुलाम की तरह स्वीकारा। यही हाल हर उस भारतीय मुसलमान का होगा ,जो अपनी भारत माँ से ज्यादा अरब को चाहेगा। अपनी माँ त्यागकर किसी दूसरे का गुलाम बनना सिवाय मूर्ख -शिरोमणि के अतिरिक्त कोई नहीं कर सकता।

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