मुझे कैसा हिंदुस्तान चाहिए ?

पूछते हो ,मुझे कैसा हिंदुस्तान चाहिए ?
मुझे तुलसी के साथ रसखान चाहिए।

मुझे चाहिए मोइनुद्दीन गरीब नवाज़ ,
उसके साथ फिर सूरदास की आवाज।

इतिहास को विकृत करने वाले मुझे कदापि नहीं चाहिए ,
सच को झूठ और झूठ को सच कहने वाले नहीं चाहिए ,

यह देश यह मेरा राष्ट्र , पुरातन और सनातन है ,
प्रत्येक मानवता का बसता इसमें मन है।

ये सरजमीं हर प्राणी की है , है हर इंसान की ,
यही तो युगों से रही कहानी मेरे हिंदुस्तान की।

ऐ , मेरे मुस्लिम भाई अपनी पहचान करो ,
अरब को छोडो अपनी भारत माँ का मान धरो।

बस एक ही शिकायत आपसे से है ,
क्या उम्मीद्द तुम्हें अरब बाप से है ?

अपनी माँ का सम्मान करो , उसे प्यार दो ,
मीर को याद करो जायसी पर ध्यान धरो।

सरमद को याद करो मंसूर और बुल्लेशाह ,
ऐसा जो कर पाए तो हिन्दू करेगा वाह -वाह।

यदि ऐसा न कर पाए तो याद रखो स्वयं से युद्ध
जीतेगा हिन्दू याद रखो यहां न जीते बुद्ध।

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