हिन्दू राष्ट्रवादी सोच

मेरे प्रिय हिन्दू राष्ट्रवादी अपनी भी कमियां पहचानो।

आप भी १०० प्रतिशत सत्य नहीं हो। और आप यदि यह सोचते हो कि अपनी गलतियां निकालने से हमारा नुकसान होगा , तो ऐसा मत सोचो , सत्य कभी भी किसी का नुकसान नहीं करता। यह स्वीकारो की हमारी अपनी कमियां थीं जिसने हमें गुलाम बनाया।

यह स्वीकारो कि हिन्दू धर्म ने शुद्र और औरत के साथ अत्याचार किया है। मैं जब तक कमियां नहीं स्वीकारूंगा ,उन्हें सुधार नहीं पाऊंगा। जो तथ्य एकदम स्पष्ट है उसे आप इनकार नहीं कर सकते। मेरे हिन्दू बंधु अपनी गलती स्वीकारो और अपनी झूठी महिमा के गीत न गायो।

शर्म करो , ७०० साल तुम्हें मुसलमान गुलाम बनाये और ३०० साल ईसाई। इस्लाम और ईसाइयत ने तुम्हें तुम्हारी कमियों से तुम्हें गुलाम बनाया। इस्लाम और ईसाइयत का दोष नहीं। हे ! हिन्दू राष्ट्रवादियो पहले अपना घर ठीक कर लो फिर किसी और पर आरोप लगाना। मुझे इतना दुःख होता है की ये हिन्दू राष्ट्रवादी बिलकुल कट्टरपंथी मुसलमान की तरह व्यवहार करते हैं।

भाईयो , बस एक बात समझ लो , तुम दुनिया के गुलाम १००० साल। और तुम्हें यदि अब भी अपनी गुलामी का कारण समझ न आये तो मैं समझूंगा की तुम गुलाम होने के लिए ही पैदा हुए हो।

कब तक कहोगे की वर्ण -व्यवस्था कर्म आधारित थी? कब तक मानोगे के वर्ण व्यवस्था भगवान् ने बनाई ? इस्लाम के तो तुम व्यवहार को देखते हो , और अपने लिए दर्शन ले आते हो , व्यवहार को देखो कृपया हिन्दू राष्ट्रवादी । इस्लाम भी दर्शन के आधार पर आतंकवाद की रक्षा कर सकता है। इस्लाम तो यह भी कहता है की जिसने भी किसी मासूम इंसान को मारा उसने मानो सारी इंसानियत को मार दिया। इस्लाम के अनुयायी इसका अनुसरण व्यवहार में करते हैं ? एक सामान्य हिन्दू कैसा व्यवहार करता है ? दर्शन नहीं मेरे प्रिय हिन्दू राष्ट्रवादी व्यवहार देखो। जब एक ब्राह्मण किसी दलित को मात्र इसलिए मार देता है की एक शुद्र आटा चक्की में आके उसे अपवित्र कर देता है तो मोहन भागवात जी कुछ बोलो , जैसा की आप इस्लाम के लिए बोलते हो।

वापसी कार्यक्रम के तहत अशोक सिंघल जी ने कहा था की हिन्दू धर्म में वापस आने वाले मुसलमान अपनी जाति याद रखें। क्या भागवत जी आपकी भी यही सोच है ? क्या कहेंगे आप इस दलित की ह्त्या पर ? मैं जानता हूँ हिन्दू राष्ट्रवादी के पास कोई जवाब नहीं। ये लोग मनुस्मृति वाला हिंदुत्व लाना चाहते हैं। मैं इसका पुरजोर विरोध करता हूँ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *