ढोंगी भारतीय राष्ट्रवाद

हिन्दू राष्ट्रवादियों में मुझे बड़ी छटपटाहट दिखाई देती है जब वे लालू , मुलायम और मायावती को जीतते देखते हैं। उन्हें तुरंत इस्लाम ,ईसाइयत, और इन दोनों की संभावित विजय दिखाई दे जाती है। फिर तुरन्त इन हिन्दू राष्ट्रवादियों को पतित हिन्दू मूल्य और भारतीय संस्कृति के प्रति मोहभंग का भान होता है, शीघ्र ही इन लोगों का दारुण रुदन प्रारम्भ हो जाता है। फिर ये लोग छद्म्य धर्मनिरक्षेतावाद और साम्यवाद का गीत राष्ट्रीय गौरव के छंद पर गाने लगते हैं। तुरंत इन्हें राम ,कृष्ण , शिवाजी और कृष्ण देवराय याद आ जाते हैं। और फिर उस याद में ये लोग गुरु गोविन्द सिंह जैसों का तड़का लगाते हैं। मेरे प्रिय हिन्दू राष्ट्र-वादी तड़के तक मैं आपके साथ हूँ। परंतु आगे जो आप कहते हो उस पर फिर सोच लो। आप कहते हो हिन्दू संस्कृति सर्वश्रेष्ठ है। हिंदुयों ने कभी किसी पर अत्याचार नहीं किया। हिन्दू कभी साम्राज्यवादी नहीं रहे। अरे ! हिंदुयों बेशक तुमने परधर्मियों पर अत्याचार नहीं किया। करते भी कैसे ! तुम्हें स्वधर्मियों पर अत्याचार से फुरसत मिलती तब न ! मैं इसे कायरता कहूँगा। जब बाहर पीटने की हिम्मत न हुई तो , अपनी पत्नी को पीट लिया।

हिन्दू धर्म ने शूद्रों के साथ जो अत्याचार किया ऐसा किसी भी धर्म ने अनुयायियों के साथ नहीं किया। बेशर्मों ! फिर भी वे तुम्हारे साथ रहे। तुमने उनकी बेटी बहनों को अपनी रखैल समझा वे यह भी पी गए। तुमने उनसे अपने मल ढलवाए वे यह भी सह गए। तुमने उन्हें हर जगह अपमानित किया , पशुतुल्य समझा फिर भी वे तुम्हारे ध्वज को थामे रहे। आज उनमें अकल आयी है तो वे अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए मायावती , मुलायम लालू को चुनते हैं तो तुम्हें आग लग जाती है !

क्यों नहीं शंकराचार्य जाकर एक दलित के पैर धोकर माफ़ी मांगते की हमारे पूर्वजों ने गलती की। हमें माफ़ करो। मोहन भागवत , विहिप प्रमुख इनके चरणों गिरकर माफ़ी मांगें की गलती हुई। ..हिन्दू मठाधीश इनसे माफ़ी मांगे की हमारे पूर्वजों से गलती हुई। ये लोग ऐसा कुछ नहीं करेंगे। हिन्दू महाराज अब दलित इतना चूतिया नहीं की अपनी लड़की भी तुम्हें दे और तुम्हारे पैर भी दबाये। कितने ब्राह्मण तैयार हैं अपनी बेटी की शादी दलित से करने को ? यदि नहीं तो यदि दलित मायावती को वोट दे तो कृपया अपना पारा नीचे रखो। तुम जैसे दोगले बहुत देखें हैं इस देश ने।

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