भारत पाकिस्तान युद्ध विकल्प

उरी पर आतंकवादी हमले के बाद फेसबुक पर युद्ध के सुझावों की बाढ़ सी आ गई है। लोगों के सुझाव हैं की अब वह वक़्त आ गया है जब भारत को पाकिस्तान के साथ निर्णायक युद्ध करना चाहिए , रोज -रोज के मरने से बेहतर है कि एक बार में तय कर दिया जाए ,इत्यादि -इत्यादि। लोगों का कहना है की भारत को इजराइल और अमेरिका जैसी नीति का अनुसरण करना चाहिए , और पाकिस्तान की एटमी ताकत की गीदड़ भभकी से नहीं डरना चाहिए। बहुत से लोग यह कहते हैं की हमें अब युधिष्ठिर नहीं , प्रत्युत अर्जुन का गांडीव और भीम की गदा की जरूरत है , युधिष्ठिर को स्वर्ग जाने दो। इस तरह के सुझाव अधिकतर हिन्दू कट्टरपंथियों की तरफ से दिए जा रहे हैं। लोग मोदी जी पर भी आरोप लगा रहे हैं की वे कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे।

युद्ध की बात करना और वास्तव में युद्ध करना ये दो बहुत ही अलग बातें हैं। जो लोग युद्ध का सुझाव दे रहे हैं , उन्हें इतना तो ज्ञात ही है की इस समय उन्हीं की मानसिकता का व्यक्ति प्रधानमन्त्री है। और मोदी जी कोई मूर्ख व्यक्ति नहीं हैं , इतना तो उनके विरोधी भी स्वीकारते हैं। यदि उनके जैसे चरित्र का व्यक्ति युद्ध से बचना चाहता है तो अवश्य ही कोई ठोस और वास्तविक कारण होंगे।मैं यह मानता हूँ की कभी -कभी युद्ध अपरिहार्य हो जाता। मानव -मूल्यों की रक्षा के लिए कभी -कभी सबको आहुति देनी पड़ती है। परंतु , शक्तिशाली का यह भी कर्त्तव्य है की वह उम्मीद की आखिरी किरण तक शान्ति का प्रयास करे। इसी में शक्तिशाली का गौरव और गरिमा है। अर्जुन और भीम के रहते हुए और स्वयं भगवान् के रहते हुए भी , भगवान् शान्ति के लिए ५ गाँव तक की सीमा तक चले गए थे। पांडवों जैसे पराक्रमियों के लिए ५ गाँव मांगना एक तरह से भीख मांगना था , फिर भी शान्ति के लिए भगवान् ने दुष्ट दुर्योधन से भीख माँगना तक स्वीकार किया।

युद्ध तो अंतिम विकल्प है , और यह विकल्प सदैव खुला है। पाकिस्तान तो स्वयं बर्बाद होने पर तुला हुआ है। जिसने कपडे पहन रखे हैं ,उसे नंगे से लड़ने में १०० बार सोचना पड़ता है क्योंकि नंगा तो पहले से ही नंगा है ,पर उसकी कोशिश विरोधी के कपडे उतारने की होगी ,नंगे का क्या बिगड़ेगा ? भारत ने बहुत प्रयास से विश्व में जगह बनाई है और विकास के मार्ग पर है। इस समय में युद्ध भारत को ५० साल पीछे कर देगा। इसके अलावा भारत की भू -राजनीतिक विवशताएं हैं। भारत पेट्रोल तथा डीज़ल के लिए पूरी तरह से इस्लामी देशों पर निर्भर है। भारत को अधिकतर विदेशी धन अमेरिका या यूरोप से नहीं मिलता , यह मिलता है खाड़ी देशों से , जहां भारत के बहुत लोग कार्य करते हैं। पाकिस्तान के विरूद्ध युद्ध की परिस्तिथि में मुस्लिम brotherhood ,तेल देना बंद कर सकता है ,साथ ही खाड़ी देशों में भारतीयों जीवन संकट में सकता है। चीन भी पाकिस्तान के साथ है। बाहर रहकर सुझाव देना बहुत आसान है , लेकिन प्रधानमन्त्री को ये सब बातें सोचनी पड़ती हैं। मेरे अनुसार युद्ध बजाय भारत का प्रयास पाकिस्तान को अंदर से तोड़ने का होना चाहिए। बलोचिस्तान आंदोलन को भारत पूर्ण समर्थन दे , गिलगित के विद्रोह को और हवा दे। जो पाकिस्तान कश्मीर रहा है वैसा ही भारत बलूचिस्तान और गिलगित में करे। और साथ ही भारत पाकिस्तान से सभी रिश्ते तोड़ दे , उसके साथ कोई बातचीत अब भविष्य में भारत न करे। खुला युद्ध न करे न, परंतु छिपकर पाक गृहीत कश्मीर में आतंकवादी शिविरों हमला किया जा सकता है। पाकिस्तान जैसे दुष्ट देश को उसी की भाषा में उत्तर देना चाहिए , खुला युद्ध भारत के लिए हितकर नहीं होगा।

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