भारत माता

मुझे न जीता गैरों ने , किसी ने न मुझे हराया ,
में तो अपनों से हारा ,क्या जीतता मुझे पराया ?

मेरे भारत को तो उसके पुत्रों ने मारा ,
फिर बताओ क्या करे पिता बेचारा ?

हे ईश्वर ! हे कृष्ण ! कब फिर राह दिखाओगे ?
आज आओ ,यहां कोई अर्जुन न पाओगे।

यहां आज नया पैदा हुआ दुर्योधन ,
विद्वान् भी उसे समझते सज्जन।

जब दुर्योधन को समझें जन अर्जुन ,
तो फिर कैसे प्रभु ये देश के दुर्दिन ?

मेरा देश , मेरा राष्ट्र प्रभु एक सरिता ,
आशीष दो बन जाऊं मैं एक सविता।

आपका प्रभु ये दिव्य स्थान ,
कर रहे हैं लोग अपमान।

प्रभु फिर से गीता करो अवतरित ,
दो मुझे शक्ति प्रतिक्षण नित -नित।

हे करुणागार ! हे कृष्ण , तेरा ही मान होगा ,
इस भारत भूमि में बस हिन्दू ही प्रधान होगा।

पर विश्व की कुदृष्टि भी तो देख ,
भारत को चाहिए अर्जुन अनेक।

मेरे कृष्ण , मेरे गिरधर , मेरे इष्ट , मेरे भगवान् ,
दे मुझे शक्ति की मुहम्मद का न चले यहां ईमान।

तेरे लिए मेरे कृष्ण और राम ,
देश कर सकता जीवन तमाम।

राम का धनुष और कृष्ण का चक्र ,
जैसे कि हिरन के लिए व्याघ्र।

ये धरती है शिव ,कृष्ण और राम की ,
दिखा देंगे सबको हम दुनिया तमाम की।

डर फिर भी लगता की मुहम्मद की यारी है ,
उसका ऐय्याशी का कायदा सब पर भारी है।

मुहम्मद ने किये जन्नत में हूरों के वादे ,
बेबकूफ जिहादी लड़ते बस इस कायदे।

खैर ! मेरे देश जब तू न झुका मुग़ल से ,
तो क्या उखाड़ेगा इस्लाम इस शग़ल से ?

तू अक्षय , अक्षय तेरा जीवन ,
बदलेगा तू विश्व का मन।

तुमने ही तो मेरे भारत जगत को ज्ञान दिया ,
मुस्लिम भी एक दिन मानेगा तुझे पिया।

तू तो मेरे देश सबकी प्रिय माता है ,
मुस्लिम भी कल तेरी गोद आता है।

तू ही मेरी माँ करेगी विश्व विजय ,
नहीं इसमें मुझे कोई संशय।

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